ओछा तिनका
जज़्बात नही कीमती होते , केवल कीर्तिमानों। होते है तृणमूल -पतिगों के भी । है गर तुच्छ दुनिया उनकी , तो फिर आपकी ही है कितनी ।। फिर छोड़ें क्या प्रयास निरत रहने की ? भाव नही यह कहने का प्यारे । पर उपहास उन्हीं का करना , है न्यारी कितनी बात प्यारे ।
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