अटूट दोस्ती
पकड़े थे हाथ, क्योंकि दोस्ती अटूट थी सालो का साथ, क्योंकि दोस्ती अटूट थी सत्य को नकार दिया, क्योंकि दोस्ती अटूट थी अंतिम घड़ी में घड़ी ही टूट गई हाथ की पकड़ अपने आप ही छुट गई दोस्ती न तोड़ेंगे, दोस्ती न छोड़ेंगे दोस्ती के लिए हर किसी से लड़ेंगे एक दूसरे की सुरक्षा दोस्ती का नियम था विश्वास ना टूटे इसलिए दोस्ती एक कसम था झूठे कसमों का पहाड़ टूट रहा है इसलिए अब सबका हाथ छुट रहा है अब छुट गया हाथ, तो आंसू चुरा रहे हो बीती हुई कहानी, बया भी नही कर पा रहे हो जो आया हैं वो जायेगा ,तुम्हे समझ क्यों नहीं आ रहा है नजर छुपा के बताया जा रहा है मिलेंगे दुबारा बोलके फुसलाया जा रहा है यादों के पन्नो में सिमट गई दोस्ती बुक हो गया टिकट आ गई ट्रेन आंखे चुरा के चल दिए अपनी बस्ती विदाई के बाद दोस्त कभी ट्रेन के पीछे नहीं भागा है क्योंकि सच्चाई तो यही है की सब मोह माया है।
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