और एक साल बीत गया
हाल बदले तो कोई बात बने, साल तो हर साल बदलता है, कोई मिलता है कोई बिछड़ता है, ये सिलसिला यूं ही चलता रहता है, कहीं टूटती उम्मीद तो कहीं टूटते ख्वाब, छोटी सी जिंदगी में तकलीफें बेहिसाब, सिलसिला ए जिन्दगी में ना जाने क्या–क्या छूट गया, हम दिन गिनते रहे और एक साल बीत गया.. खैर नए वर्ष का नया सवेरा कुछ तो नयापन लाएगा, चलता रहा जो अबतक शायद सब बदल जाएगा, आखिर जीवन की रीत यही है यहां सब चलता रहता है, हाल बदले तो बात बने – साल तो हर साल बदलता है।।
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