खीलाफ
खीलाफ ==================== खीलाफ बहोत है, फिर भी प्रेम करने का जब्बा, अभी जींदा है. वाकीफ वो जमाने से है, लेकीन हमारा मसला थोडा, अलग है. जमाना तारीफोके फुल बांधकर, प्रेम मे विश्वास हासील करते है, जहा हम, कयामत्तक साथ देनेका दम भरते है. प्रेम के खीलाफ कौन है, फीर हम कहा देखते है, जोभी बन पडे हम, फिर कोसीस जरुर करते है. खिलाफ कौन है ऊनको यारो मारो गोली, पहले तो हम प्रेम की भाषा समजते है, खिलाफ को तो हम........, यरो कचरा समजते है...., कचरा समजते है. ================={
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