छुट्टियां खत्म
आज छुट्टियां हो गई खत्म, कल से उसी जाने पहचाने रास्ते पर निकलेंगे हम। अब अगले साल तक याद आएंगे, परिवार के साथ बिताए पल, उनका साथ ही है सब समस्याओं का हल। वो प्यार भरे लम्हे, वो खट्टी मीठी बाते, बचपन के दोस्तो साथ की मुलाकाते। रात देर तक जागना, सुबह जल्दी 9,10 बजे उठना। दिन में पी जो ठंडी ठंडी रबड़ी, बीच बीच में लाल तरबूज कभी खाई वो ककड़ी। लगा हुए आजाद , जैसे टूट गई बेड़ियां, जिगरी दोस्तो साथ बाइक पर लगाई जो गेड़िया। न सुबह की भागम भाग, न काम का बोझ, सुबह शाम बस गांव की प्रकृति की खोज। भाई बहनों से लंबी लंबी बातें, हंसी मजाक में कट जाती थी रातें। दोस्तो संग बेवजह भटकना, छोटी छोटी बातों पे जोर से ठहाके लगना। शाम को टपरी की चाय, छोटों को दी जो अमूल्य राय। कल से फिर शुरू हो जाएंगे भी तराने, बच्चों के अजीब अजीब बहाने। अब ये छुट्टियों का दौर कुछ दिन यूंही सताएगा, घर में था जो मस्त मौला वो कल से गंभीर हो जाएगा। यादें तो बहुत है, हो गई देर, अब पेन पड़ेगा रखना, क्योंकि सुबह जल्दी उठकर स्कूल है भागना।
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