सीख
जिंदगी में हर एक शख्स आया एक नई सीख देने के लिए वो आया तो दर्द को सहना सिखा गया तू आया तो दर्द में खिलना सिखा गया वो आया तो मासूमियत चुरा ले गया तू आया तो आंखों से सपने चुरा ले गया वो आया तो रोना सिखा गया तू आया तो हंसना सिखा गया आख़िरकर सब ही छोड़ चले गये फिर चाहे वो हो या तू बस बहाने सबके अलग - अलग थे शायद मैं ही सीखने में अच्छी न थी जो यूं तन्हां ही रह गई जो यूं तन्हां ही रह गई
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