इत्तेफ़ाक़
अँधेरे में तुमको मैंने पाया है , तुमको अपना साथी बनाया है ! लोगो से सुना है मैंने, इत्तेफ़ाक़ से लोग मिला करते है! किस्मत और वक़्त से परिन्दे मिला करते है! पर तुमसे मिलना इत्तेफाक़ नही हो सकता, और मोहब्बत होना तो बिल्कुल भी नहीं!🌹 लोगो को मालूम नहीं तुम्हारा रास्ता, मालूम नही शायद मंज़िल धड़कन लिए बैठे है, पर नही जानते अपना दिल! चलो मान लेता लोगो की बातों को भी, के लोग किस्मत और इत्तेफाक से मिला करते हैं पर तुमसे मिलने के बाद मैंने ये भी जान लिया, के तुमसे मिलना इत्तेफाक़ नही हो सकता, और मोहब्बत होना तो बिल्कुल भी नहीं!🌹 -संयम अरोरा
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