जरूरी हैं
यहां लोग हमें बदनाम भी जरूरी हैं तुम्हारे इस इश्क़ को अंजाम भी जरूरी है हो रहे हैं उसके पीछे जाने कितने कत्ल और वो कहती है कत्लेआम भी जरूरी है मजनू को सारी जिंदगी दर-दर भटक कर लैला सा आखिर में एक मक़ाम भी जरूरी है मीठा जरा तेज है और चखकर ये पता चला तुम्हारे हाथ की इस खीर में बादाम भी जरूरी है Lakshay Jain
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