रूको नहीं !
हाल , कब से पूछ रहा हु ? कब बताओगे? पलके भारी होने लगी है , आंसु कब तक छिपाओगे? यू टूटना बिखरना तो पत्थरों का काम है , तू चट्टान बनकर कब सामने आओगे! आने वाली हसरतें मोड़ दो, बेफिजूल अश्कों पर अफ़सोस जताना छोड़ दो , कह दो ख्वाब पूरे करने में लगा हु , सूरज से चमक उधार लो , चांदनी से मिलना छोड़ दो!
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