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मेरे असमंजस संबोधन! कई दिनों के पश्चात, मैं तुम्हें यह पत्र लिखने का साहस कर रहा हूं। कई दिनों से मैं तुम्हें पत्र लिखने का विचार कर रहा था, लेकिन तुम्हारी प्रतिक्रिया के बारे में सोचकर मैं हिचकिचा रहा था। अब जब इतने दिनों में मैं भावनात्मक रूप से शून्य हो चुका हूं, तो मैं तुम्हें यह पत्र लिखने का साहस कर पा रहा हूं। एक बात और में पहले बता देता हूं कि में जो कहने जा रहा हूं उससे तो समझना परंतु में जो नहीं कहूंगा उसी में ही मेरे पत्र का सार है.... मेरे शब्दों के पीछे की भावनाओं को समझने की कोशिश करना, और मेरे हृदय की बात को सुनना। आज, मैं इस पत्र में अपने हृदय की गहरी वेदना को तुम्हारे सामने प्रस्तुत कर रहा हूं।
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