सन्नाटा
बेतुके शोर में ऐसी गहराई से डूबे के नैनो से बहते आसू खामोश घर के अकेलेपन में ही खो गए। यू टोह हम लड़ आए पूरी दुनिया से पर मंजिल पाकर जब फतह के मैदान में जब उतरे, टोह हमेशा खुद को तन्हा ही पाया। ना रोने के लिए कंधा और ना सहारे के लिए हाथ, बस एक और मुकाम और झूठे आश्वासन कि इसके बाद जिंदगी का सुधार पक्का।
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