बदलते लोग
तेरा स्वार्थ था तबतक तुम साथ था तेरी नज़रों में मैं बहुत अच्छा था लोग कहते थे कि तुम तो मेरे बड़े प्रशंसक हो मुझे भी लगता था कि तुम बहुत अपने हो। पर स्वार्थ सध गया अब उम्मीद न रही पन्ना ही पलट गया दूरी तो बना ली कोई बात नहीं मेरी निंदा करने में अव्वल हो गया। नरेंद्र सिंह 04.12.2023
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