हरिगीतिका छंद
शीर्षक:प्रभु ही पालनहार है मानव सदा यह ध्यान रखना, ईश ही आधार है। पालन करे सबका वही तो, जानता संसार है। शाश्वत सनातन हैं वही तो, मानता है यह सभी। रचना करे सारे जगत जो, भूलना न उन्हें कभी।। नर कुछ नहीं प्रभु के बिना तुम, याद कर इस बात को। रखता वही है ख्याल सबका, दूर कर संघात को।। भजते रहें सब मिल उन्हें ही, तारता संसार को। प्रभु एक ही तो आसरा है , खेवता मझधार को।। नरेन्द्र
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