तुम मानो चाहे या न मानो
खोने से मैं तुझको हूँ डरता, हर पल बस तुझसे जुड़ने को तरसता। मैं यहीं हूँ, यही कहता हर दफ़ा, तुम मानो चाहे या ना मानो। जब जाती हो तुम नाराज़ कहीं, चुप हो जाता हूँ, बुझ-सा यहीं। फिर याद आती हैं मीठी बातें पुरानी, दिल चाहता है कहूँ हर बात ज़ुबानी। तुझको मनाने को भेजूं सौ उपहार, तुम मानो चाहे या ना मानो। औरों-सा ना हूँ मैं, ये सच है, तेरे पीछे पड़ा नहीं, बस तेरा सच्चा पथ है। पाने को तुझको करूँगा बस इंतज़ार, न होगा कोई शोर, न होगा इज़हार। तुम मानो चाहे या ना मानो। खोने से मैं तुझको हूँ डरता, पर अपनी चाहत से ना कभी मुकरता। मैं अब भी बस तुझसे यही कहता, तुम मानो चाहे या ना मानो।
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