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अकसर,... मैं अपने आस पास नज़र दौड़ाऊँ, अपने संगी साथियों की संघर्ष कहानी सुनूँ, उनके बीते कल और आज की ज़ुबानी सुनूँ, तो पता चलता है कि..... मेरे संघर्षों का आदि तो हुआ, पर अन्त कभी नहीं,... मैंने जीना शुरू करने की कोशिश तो की, पर जिया तो कभी नहीं.... मेरे बीते कल और चल रहे आज में, मज़े करने के मौके मिले ही नहीं, सबके सपने, ख्वाहिशों को पूरा करते करते, ज़िन्दगी का एक लम्बा अरसा तय कर लिया मैंने, लेकिन, ख़ुद के लिए तो कुछ किया कभी नहीं.... दोस्तों की मुस्कुराती, मौज मनाती तस्वीरों से थोड़ी जलन सी होती है, क्योंकि, ये सब करने को मुझे मिली मोहलत कभी नहीं.... ✍️😐
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