वर्षा आगमन (डमरू घनाक्षरी)
उमड़त घुमड़त,चमकत गरजत, घहरत हहरत,नभ घन ठनकत। रह रह कड़कत,झम झम बरसत, दिनकर तड़पत,छिपकर तरसत। कृषि-जन निकलत,हल कर पकड़त, पुलकित मचलत, मन रख हसरत। नद सर उफनत,कल कल छलकत, उपवन विहँसत ,तृण तरु हरषत । नरेंद्र सिंह 15.05.2024
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