मेरी चांद
मेरी सान्सोन मे तु बस्ती है, खयलो मे तु सज्ती है । नजाने कैसे अंदाज , अपने आदतों मे तु रख्ती है ।। तेरी खुब्सुर्ती बयान करने में टूटा कलम मेरा घबराए । क्युकी डिल मे तो मोहब्बत बोहोत है लेकिन शब्दो मे कैसे सम्झाए ?
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