वो राह
मुझे इस राह पर अकेला छोर गए तुम फिर से वही जाकर खड़े हो गए जहां से हम दोनों साथ चलकर आए थे कई कसमें कई वादे कर आए थे ना हाथ छोड़ने का न साथ छोड़ ने का इतना आगे तक का सफर तय किया फिर क्यों मुझे अकेला छोड़ गए वापस क्यों वही जाकर खड़े हो गए अब फिर किसी नए के साथ शुरुवात करोगे फिर से वही कसमें वही वादे करोगे उसके साथ फिर आगे बढ़ोगे क्या उसका हाथ छोड़ने का वादा कर पाओगे या उसे भी आधे रस्ते छोड़ जाओगे मुझे नहीं है अब कोई उम्मीद तुम्हारे आने की कल भी अकेली थी आज भी अकेली हु न उम्मीद है किसी ओर के आने की प्यार तो हम दोनों ने ही किया था एक दूसरे से फर्क सिर्फ इतना है हम आज भी यही खड़े है तुम चले गए तलाश करने किसी दूसरे की।
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