दुष्टों की परिभाषा
सज्जन लोग से ये रखता बैर, नहीं चाहता ये उनकी खैर। अच्छी चीजें से इसे इनकार, बुरी लत ही जिसे हो स्वीकार। असत्य वचन और कटुवाणी, चाहे सदा जो दूसरों की हानि। पर निंदा सदा जिसे पसंद हो, पर कष्ट में जिसे अतिआनंद हो। सबका बुरा हो, रखे अभिलाषा, दुष्ट जनों की है यही परिभाषा। नरेंद्र सिंह 15.12.2023
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