ये हौंसले!!
यूं ही नहीं हौंसले यारा होते बंद कमरों में बस आज थोड़ा सा रो लेते तकलीफों का क्या है वो छंट जाएंगी रख हौंसला खुशियां फिर आएंगी है यक़ीन तुझे अगर खुद पर तो न डर चल इस डगर पर होंगे साथ तेरे अपने जो देंगे तुझे हिम्मत और सुनहरे सपने बस तू रखना धीरज आज नहीं तो कल उजाला फिर आयेगा इन अंधेरों से क्या डरना तू खड़ा होके दौड़ जो लगाएगा चट्टानों से जो कभी हताश नहीं होते वो इरादों की ठोकर से उनको तोड़ ही देते यूं ही नहीं हौंसले यारा होते बंद कमरों में बस आज थोड़ा सा रो लेते ।।
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