कमाल करते हैं.......
शोर में सन्नाटा, सन्नाटे में शोर ढूंढते हैं। जिंदगी की तो गारंटी है नही, और लाइफटाइम वारंटी ढूंढते हैं। जो है उसकी तो कद्र नहीं करते, समय पर किसी की मदद नही करते, चरित्रहीन होकर चरित्रवान ढूंढते हैं । फिर सरे बाज़ार अपना कदरदान ढूंढते हैं।। घर के होते हुए भी मकान ढूंढते हैं, नौ छौ, तीन पांच करते हैं अपनो से भी , कमाल की बात है की फिर, चैन की नींद,और सुकून की सांस ढूंढते है । निभाना जानते नहीं खुद लोग रिश्तों को , न जाने क्यों फिर दूसरों में ऐब बार बार ढूंढते हैं। मोहब्बत हो , दोस्ती हो या हो रिश्तेदारी, सबमें बस अपना फायदा ही हर बार ढूंढते हैं । हर बात बस अपने हिसाब से हो , चोरी से हो या भ्रष्टाचार से हो , कर्म खुद का दिखता नहीं। फिर रेगिस्तान में गंगा की धार ढूंढते हैं।।
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