लगनशील बनें
तमन्ना बहुत ऊँची रखें, पर जोश रखो दूना। दृढ़ संकल्प कर लो मन में, लक्ष्य को अवश्य है छूना।। जब तक तमन्ना पूरी न हो, तब तक डटे है रहना। कोई लक्ष्य असंभव नहीं, यह सदा याद है रखना।। सभी मानव एक ही जैसा, किसी में कोई फर्क नहीं। जो श्रम किया वह सफल हुआ, इसमें कहीं कोई कुतर्क नहीं।। जो दृढ़निश्चयी होते हैं, वे बहाने नहीं ढूंढा करते। आरक्षण हो या विपन्नता हो, इसे लेकर नहीं कुढ़ा करते।। लाखों अच्छा कर रहे हैं, आज आरक्षण काल में भी। लाखों लक्ष्य पा रहे हैं, विपन्नता के हाल में भी। नरेंद्र सिंह
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