तेरा शहर
याद रखना तेरा शहर छूटने के बाद में हर इक गली में जाऊंगा सावन की बूंदे छोड़कर अब पतझड़ के ओलो से नहाऊंगा याद रखना तेरा शहर छूटने के बाद में हर इक गली में जाऊंगा अब खिलूंगा में सबके लिए पर तुझपे पतझड़ सा बिखर जाऊंगा और बैठ रातों को अकेले गुमसुम कहीं में मुस्कुराऊंगा याद रखना तेरा शहर छूटने के बाद में हर इक गली में जाऊंगा अब महफिले मशहूर मेरे नाम से होंगी हर गली चर्चा हमारी आम सी होंगी और नसीब में मेरे जो ये शहर लिखा होगा ऐसे मुकद्दर को सौ बार ठुकराऊंगा याद रखना ये शहर छूटने के बाद हर इक गली मे में जाऊंगा देवरूद्र
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