शुरू करते हैं....
मरहम-ए-ज़ख्म पर मलना शुरू करते हैं, रास्ते एक नए पर चलना शुरू करते हैं, ये एक नया साल है ख़ामोश कब तलक रहे, चलो यार हम भी अब खुलना शुरू करते हैं, ये सोचकर कि कौन है वो आईने का शख्स, फिर सोचकर कि इससे अब मिलना शुरू करते हैं, एक वो हंसी जो जान है इस पूरे बग़ीचे की, जिसको सुनकर फूल भी सब खिलना शुरू करते हैं, पहले टौंक देते थे अब बेशर्म मैं हो गया, वो सभी अब देखकर जलना शुरू करते हैं, शराब महंगी चीज़ है और हम है सीधे लोग, आओ हम सब चाय में ही घुलना शुरू करते हैं..... 👉🏻Lakshay Jain
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