शक्ति स्वरूपा नारी!!
हे भक्ति स्वरूपा प्रेम स्वरूपा! सहस्त्र अल्फाजों के पन्ने पर लिखी किताब हो तुम, शक्ति में जीवन ,माया में माधुर्य, जग के स्थायित्व का आधार हो तुम, ममता की मूरत ,सहनशील सी दृढ़ निश्चयी आकाश हो तुम, दुर्गा सी शक्ति, काली सी तेजस्वी, सरस्वती सी विदुषी , अन्नपूर्णा के रूपों का प्रसार हो तुम परम सौभाग्य की प्रतीक वल्लभा, कलत्र, भार्या के अलंकरणों से सुशोभित माया हो तुम, सुख समृद्धि यश वैभव से सिंचित अंधकार सी क्षुधा का मिटता प्रकाश हो तुम , ललाट चंद्र धरे शिव की अर्धांगिनी गिरिराज कन्या उमा हो सारा संसार तुम, हे वंदित नारी तुम्हे "अभिक्षा" का बारंबार प्रणाम है प्रणाम है।। है
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