दीप जलेगा ही
जो जले, जिसकी जले , जितना जले पर दीप तो जलेंगे ही दीवाली तो मनेंगी ही। खर, दूषण ,ताड़का तब भी थे अब भी हैं वो रहेंगे ही पर दीप जलेंगे ही दीवाली मनेंगी ही रामलला विराजेंगे ही केशरिया ध्वजा लहरेगा ही जय श्री राम का नारा गूंजेगा ही राममय धरा होगी ही 22 जनवरी तो आने दो। नरेंद्र 19.01.2024
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