हैवानियत......
यार क्या कसूर था उसका जो ऐसा सलूक किया हैवानों ने जाने कितने आजाद घूम रहे है जाने कितने भरे है जमानों मे आखिर कब तक हमें ये दर्द सहना होगा कभी कोई दूसरा तो कोई अपना होगा आज एक माँ की दुनिया सूनसान हो गयी..... एक नन्ही सी जान आज बेजान हो गयी...... ना जाने कितना चीखी होंगी जब हैवानों ने गला दबाया रोती बिलखती गिड़गिड़ाई होंगी तब भी उनको तरस ना आया जाने कैसे होंगे वो लोग जो ऐसा कुकर्म करते है रहते है हम सभी के बीच हम फिर भी न पहचानते है बस ऐसे ही एक गलती हमसे अनजान हो गयी...... एक नन्ही सी जान आज बेजान हो गयी...... सरकारे आज सफाई दे रही है. अपने दाग़ पर मिट्टी डाल रही है हम अब इतने भी नहीं अनजान हमें पता है हमारा - संविधान ये मसला राजनीति का नहीं साहब सोती इंसानियत को जगाने का है उस माँ से पूछो जिसकी खुशियाँ बीरान हों गयी एक नन्ही सी जान आज बेजान हो गयी......
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