रीत
न जाने कितने हमने जतन किए घुटने घीस गए राहों में, फिर भी न हुई हमारी,रीत जगत की जिसके लिए त्याग हमने सारे वचन दिए।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
न जाने कितने हमने जतन किए घुटने घीस गए राहों में, फिर भी न हुई हमारी,रीत जगत की जिसके लिए त्याग हमने सारे वचन दिए।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets