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यही सोचकर के तेरा ख्याल कौन रखेगा मेरे बाद तेरे कोल कौन बैठेगा मै हर रोज़ मोहलत मांग लेता हूं खुदा से रोज शाम रो कर ना गुज़रे, सुबह तेरी गमज़दा ना निकले दिन में तुझे धूप ना लगे, रात में तेरे हो उजाला मिलें तुझे ठंडी छांव हर पल, मैंने आज तक कोई दरख़्त नहीं उखाड़ा तुझे तन्हाई ना लगे, मैंने परिंदों को खबरदार रखा है शहर भर में ना लगे अगर दिल तेरा, मैंने जंगलो को यार रखा है यही सोच कर मैंने ख़ुदको तेरे नाम रखा है
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