तनहा सफर
बुखार चड़खे उतर गया और चल पढ़ी जिंदगी की गाड़ी फिर से उसी पटरी पर जहां जुड़कर भी मिल ना रहे दो अनजाने प्रेमी। यह किस्मत भी कितनी अजीब है खुशियां तो देती है अपने हिसाब की पर टुकड़ों में बाटकर। प्यास चाहे सफलता की हो या किसी की इंतज़ार की तरसती हर एक को बराबर है।
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