गझल : करे इशारे गझल
तेरी खता अब मेरा ये दिल करने लगा चाहत भरी ये दास्तां तुझमें समाने लगा...१ तेरी सूरत देखकर दीन यू गुजरने लगा आसमां भी तुमको हर पल चाहने लगा ...२ नशा आंखो मे तेरा अब ये चढने लगा रात भी तुम्हारी इंतजार मे डूबने लगा...३ हसी तेरे गाल अब कुछ फरमाने लगा मेरी गझल मे तुमको साद भरने लगा...४ करे इशारे गझल मेरी अब गाने लगा पसंद आयी तुमको तो प्यार होने लगा...५ धनराज नथू बाविस्कर मो.९०१६०३१७१२
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