हाँ
एक रोज सोचना यार सलोने तुम साँझ सवेरे तन्हा कैसे ढलते होंगे हक़ीकत में ना सही, पर हम कहीं ख्वाबों में तो मिलते होंगे
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
एक रोज सोचना यार सलोने तुम साँझ सवेरे तन्हा कैसे ढलते होंगे हक़ीकत में ना सही, पर हम कहीं ख्वाबों में तो मिलते होंगे
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets