रंगीन इश्क
सपने सुनहरे धीरे धीरे ज़हन में उतरने लगे; सूने से राहों पर हाथ थामा उसने ऐसे कि मैं अपने ही दुनिया में गुम सी होने लगी; डुबाकर मेरे सारे दुख भर गया मेरे झोली में रंग हजारों राग के।
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