परिस्थिति की जवानी !
में हार नहीं सकता..! में रुक नहीं सकता..! बापू की लाठी हूँ में, माँ की छाती हूँ में..! में मिट नहीं सकता, पीछे में हट नहीं सकता..! घर की भभकती हुई ज्वाला हूँ में..! घर का एक मात्र उजाला हूँ में..! अम्मा के लड़खड़ाते शब्दों का सहारा हूँ में..! अबू की नईया का किनारा हूँ में..! बापू हाथ मेरे छोटे हैं, कैसे में आगे बडाऊं..? बापू कंधे मेरे नन्हे है, कैसे में बोझ उठाऊँ..? कभी अपनों के लिए रोता हूँ..! कभी सपनों के लिए रोता हूँ..! जिंदगी के सफर में चलते-चलते थक जाता हूँ..! कभी बापू की लाचारी देखता हूँ..! कभी माँ के ढलते आँसू देखता हूँ..! भटक जाता हूँ चलती राहों में..! रुक जाता हूँ हर बार किसी न किसी अभावों में..! बापू हाथ मेरे छोटे हैं, कैसे में आगे बडाऊं..? बापू कंधे मेरे नन्हे है, कैसे में बोझ उठाऊँ..? -रावल
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