कभी कभी
कभी-कभी खुद को रोकना मुश्किल सा हो जाता है, दर्द जो दिल बयान करता है, वो आँसुओं के ज़रिए बह जाता है। ये समय कैसे गुज़रेगा, धीरे-धीरे पर वक़्त लगेगा। बस यही बात दिल को समझाती रहती हूँ, खुद ही दिल को चुप कराती रहती हूँ। पर सवाल बार-बार यही उठता है — क्या कमी थी उस मोहब्बत में? और हर बार जवाब यही मिलता है — अब बहुत दूर चला गया है वो, जितना करीब आकर छू गया था तुम्हें। अब बस तुम और उसकी यादें अकेले हो यहाँ, रह-रह कर बस यही दिल कहता है।
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