अब वो पहले जैसी बात नहीं
चौराहे अब भी जगमगाते है, पंडाले और प्रतिमाएं अब भी सजती हैं, पर नवरात्रों मे अब वो पहले जैसा हर्षोल्लास और उन्माद नहीं । अब त्योहारों में वो पहले जैसी बात नहीं l हालांकि दीये अब भी जलाये जाते हैं, घरों में रंगोलियां अब भी बनाई जाती हैं, पर दीपावली की मिठाईयों मे अब वो पहले वाली मिठास नहीं । अब त्योहारों में वो पहले जैसी बात नहीं । हाँ धुलेंधी मे रंगों से अब भी खेला जाता है, पानी के गुब्बारों और रंग भरी पिचकारीयों से लोगों को अब भी भीगोया जाता है, पर होली मे अब वो बचपन वाली बेफिक्री और खुमार नहीं, हाँ सब कुछ तो वैसा ही है पर फिर भी अब त्यौहारों में अब वो पहले जैसी बात नहीं ।
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