अधूरा मिलन
सपनो को होल्ड पर डालकर चल पड़े तेज रफ्तार से प्रगति की गाड़ी में। ना किसी ठहराव का वक्त, ना ही कोई बंधन का डोर, तनहा राहों पर अपने मर्जी के मालिक बन अंधाधुन पहाड़ चढ़ते गए। किसी दिन तो मुकाम पर रुककर चैन की सास ले सप्फर की सफलता पर मुस्कुराएंगे।
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