"कोमल हृदय पर आघात"
मैंने बहुत कुछ देखा, बहुत कुछ खोया जीवन के हर पड़ाव में बस भावनात्मक आयाम को सर्वोपरि रखा, और कोमल हृदय पर कई आघात सहे है। पर इतने कोमल हृदय पर जब घावों के आघात परिपक्व हो जाते है। तो हृदय कब कोमल से कठोर होने का सफर तय कर लेता है। इसका अनुभव भी नहीं हो पाता है जीवन में जो भी अनुभव हो, स्वीकार्य है परन्तु ये कठोरता जैसे जकड़ रही है और कोमलता कहीं पीछे छूट रही है। रिश्ते उलझे है, ख्वाब रुकसत है घर से, ख्वाइशो के मेले में भटका है सुकून, रोज एक सफर पे निकलता है जुनून। परदे पर मंजर सजता है और बिखरता है। समझना इतना भी मुश्किल नहीं है दर्द को, बस कुछ सहना होता है , और कुछ नजरंदाज कुछ लोग, कुछ रिश्ते,कुछ एहसास, कुछ हादसे बदले और भुलाए नहीं जा सकते। किंतु वक्त के साथ हमें बदलना सीखा देते है। ✍️पुजा लोहार (मेरी डायरी से) प्रतापगढ़,राजस्थान
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