घर
रौनकों सज गई मीलों तक; खुशी से हवाएं भी झूम उठी; आसमान के तारे आज कुछ ज्यादा भिनभिना रहे; सालों के तपस्या खत्म कर हम अपने घर जो लौटे तो सारी उदासिया दहन की आग में जल्के राख में मिल गई
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