मेरी चाहत तो
मेरी चाहत तो राणा जैसी, मैं रण करने जाऊँगा । दुश्मन की सारी सेना को, मुँह भर धूल चटाऊँगा । चाहे आगे कल खड़ा हो, कभी नहीं घबराऊंँगा । दो-दो हाथ करूँगा उससे, सीने पर चढ़ जाऊँगा । नहीं डरूँगा कभी किसी से, महाकाल बन जाऊँगा । पहले हमला नहीं करूँगा, पग पीछ नहीं हटाऊँगा । मधु कैटभ वह अगर बनेगा, मैं दुर्गा बन जाऊँगा । पाक- चीन या कोई भी हो, कभी नहीं घबराऊँगा । किसका चरण सिंधु नित धोता, सिर का ताज हिमालय है । हम उस जननी के बेटे हैं, आँगन जहाँ शिवालय हैं ।
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