व्यथा
प्रेम में समर्पण के बाद एक असफल औरत उस फूल की तरह हो जाती है......... जिसमे महक नहीं बचती....... बचती है सिर्फ सुंदरता......... अंदर रह जाता है एक खोखलापन....... और सूनापन...... पूर्णिमा....... ❤🩹
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