गुड़िया रानी
मेरी प्यारी गुड़िया चिड़िया सी चहचहाती है, गुलाब की पंखड़ियों के जैसे आंगन को महकाती है। तुतलाती जुबान से जब पापा पापा पुकारती है, तू मंद हवा के जैसे जिसमें समृद्ध फसलें लहराती है। पूरे दिन थक हार कर जब घर लौट आता हूँ, तेरी मीठी सी आवाज सुनकर सब थकावट भूल जाता हूँ। तेरे साथ बिताए गया हर लम्हा खास है, क्यों जाऊं मैं मंदिर मस्जिद , तुझमें ही तो लक्ष्मी सरस्वती का निवास है तेरी मुस्कान मेरे जीवन में प्रकाश फैलाती है, तेरी मौजूदगी ही घर में खुशियां लाती है। शरारती होकर भी चेहरे से मासूमियत नज़र आती है, तितली के जैसे मेरे घर में उड़ती चली जाती है। तुझे मनाना बहुत कठिन जब अपने हठ पे अड़ जाती है, मनपसंद खिलौना पाने के लिए किसी से भी लड़ जाती है। खाना खाते वक्त नखरे बहुत दिखाती है, हर एक निवाले के लिए मुझे पीछे पीछे दौड़ाती है। स्कूल वाले दिन सुबह सुबह नींद का बहाना बनाती है, छुट्टी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर मेरी नींद खराब कर जाती है। मम्मी की डांट से बचने के लिए रोज़ नए बहाने बनाती है, गलती करके, खुद ही रोनी सूरत बनाती है। थोड़ी शैतानी, मस्ती भी करती है थोड़ी थोड़ी, बस यूंही बनी रहे ये माशा और बेयर की जोड़ी।
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