दीप जले
जो जले, जिसकी जले , जितना जले पर दीप तो जलेंगे ही दीवाली तो मनेंगी ही। खर, दूषण ,ताड़का तब भी थे अब भी हैं वो रहेंगे ही पर दीप जलेंगे ही दीवाली मनेंगी ही आज रामलला विराज गए हैं केशरिया ध्वजा लहर गई है जय श्री राम का नारा गूंज रहा है राममय धरा हो गई है 500 वर्षों का कलंक मिट गया।। नरेंद्र 22.01.2024
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