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तेरे बारे में लिख-लिख कर में तेनु प्यार करना सीखती, रब दी महर और खुदा की महर में बस तेरे लिए ही दुआ करती, कभी-कभी मैं बहुत ही बोलती,तो कभी चुप रहने के लिए तरसती, लेकिन जब से तुम मिले, में अपने - आप को शीशे के आगे सवारती, न जाने कब और कैसे, हर बार अपने -आप से पहले तेरे लिए ही दुआ करती, क्या हँसना और गाना, तुमसे एक दिन भी बाते न करने पर,शाशे लेने पर भी शक कर जाती, तेरा रुटना और मेरा हर बार मनाना, फिर भी सिफरिशो की महफिल महल बनके खडी हो जाती, इजहार की बात तो दूर है, हर तुमारि आँखो को देखकर मैं उन में डूब जाती, हर बार अपनी बात बनती-बनती रह जाती। prabha💕
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