शीर्षक :- यात्रा के दौरान चाय
सफर का एक अहसास ऐसा भी हजारीबाग से लौटते हुए बस में यात्रा करते हुए बिताए पलो को याद करते हुए एक मोड़ ऐसा भी आया जहां बस का पहिया मानो ऐसा अहसास कर रहा था कुछ तो महसूस करा रहा था , अब तो तलब है ठंडी हवा में चाय की एक मीठी अहसास की और क्या था हम ने उन यादों के पलो को याद करके चाय की चुस्की के साथ उन पलो को मीठी की ओर एक दूसरे कि मुस्कान के साथ चाय की मुस्कान में सामिल हो गए और क्या करते 'मौसम वहीं, सर्दी वही वही दिलकश दिसंबर है..... चाय वही अदरक वही, वही दिल में बवंदर है । मनोज सोरेन✍️✍️
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