षडयंत्र
वो मेरी जीत को हार में बदलना चाहते है, मेरे है शुभचिंतक ऐसा वो दिखाना चाहते है। कांटों की राह पर चलना सीखा है दोस्तो मैने, ओर वो मेरी राह में कांटे बिछाना चाहते है।। रंजिश तो कोई न थी गुजरे हुए दौर में उनसे, फिर वो किसलिए षडयंत्र रचना चाहते है। मेरी शराफत को मेरी कमजोरी समझने वाले, अब मेरी खामोशी का शोर देखना चाहते है।।
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