बुलंद
बुलंद =================== तोडकर चौकट की सीमा, होजा क्षितीज के पार......, धुंडने कुछ नये आयाम, बनाके इरादा बन जा मणमुराद. तोडकर खामोसी, कर बुलंद आवाज....., ईरादोमे थोडी जान डालकर, होजा जरा ऊस पार. एक नयी दुनिया बसाने मे, कर खुद को तय्यार....!., खोलदे बंद मुठ्ठि .......... ईरादो को कर थोडा बुलंद. कर कदर थोडी....., ईस जनमकी.........., जो मीला है तुझे उपहार.., मतकर ऊसका उपहास . ईरादो मे थोडी आग भर कर, कर खुद को बुलंद.., कर खुद को बुलंद. =============
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