मेरा परिचय
बहुत हुआ अंधेरा अब रोशनी करने दो। माना मंजिल दूर है पर कदमों को आगे चलने दो। में नहीं जानती क्या होगा तकदीर ने क्या चुना होगा। टूटे मन के टुकड़ों को थोड़ा पीछे करने दो माना मंजिल दूर है पर कदमों को आगे चलने दो है मन मौजी सा अंदाज मेरा है खुद पर ही नाज मेरा । फैलाने दो पंख मुझे आज मुझे भी उड़ने दो। माना मंजिल दूर है पर कदमों को आगे चलने दो। मत करो तंग मेरी आबा को मत धधकायो मेरी ज्वाला को मत करो आज शांत इसे ये तूफान आज उमड़ने दो माना मंजिल दूर है पर कदमों को आगे चलने दो नेहा फौजदार 🙏
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