व्यथा..🌸
हमने हल कर लिया दुश्मनी का गणित, व्याकरण दोस्ती का समझ ना सके,, पढ़ के देखे हैं रिश्तों के साहित्य पर, आवरण दोस्ती का समझ ना सके,, यूं सबक ज़िन्दगानी के किस्से सुनाते रहे, उम्र हर दिन तमाशा दिखाती रही,, मन की पीड़ाओं को गीत के साथ में, रोज गाती रही मुस्कुराती रही,, स्मरण रह गया सत्व संबंध का, आचरण दोस्ती का समझ ना सके, मैने हल कर लिया.... स्वप्न देखे कि भीगेंगे बरसात में, प्रेम संवाद पहली मुलाकात में,, जिसको चाहा है मिल जाएगा एक दिन बात हो साथ हो हाथ हो हाथ में, अनुसरण प्रेम के नित्य करते रहे
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