उदास पाते......
कुछ पल की ख्वाहिसे और कुछ खास बाते करो ना हमसे भी तुम गर खुद को उदास पाते होती दूरी नवाजिसो की खुद को भी तुम खुश पाते बांटो गमो को मुझसे भी गर कोई तुम्हारे पास आते बाँटने से होती है पीड़ा भी कम अपना समझकर मुझे भी बताते करो ना हमसे भी तुम कुछ बाते अगर खुद को कभी उदास पाते रातों मे तुम्हे बेचैनी सी होती होंगी करवटे बदल कर रात गुजरती होंगी मन के अंदर की तड़प को दूर कर लो कभी कोई मिले उसे अपना समझ लो कोई अच्छा मिलता नहीं यहाँ अपने को तो सब भूल ही जाते करो ना हमसे भी तुम कुछ बाते अगर खुद को कभी उदास पाते
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
